पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/५३

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ जाँच लिया गया।
दृश्य ३ ]
चाँदी की डिबिया
 

बार्थिविक

मैं आपका मतलब नहीं समझा।

अपरिचित

[ अपने पैर पटककर मोहक भाव से मुसकुराती है ]

ओह! आप समझते नहीं---वह पिए हुए थे। मुझसे तकरार हो गई।

बार्थिविक

[ इसे बेशर्मी की बात समझकर ]

कैसे? कहाँ?

अपरिचित

[ निःशंक भाव से ]

मेरे घर पर। वहां एक दावत थी, और आपके सुपुत्र---

बार्थिविक

[ घंटी बजाकर ]

मैं पूछ सकता हूँ कि आपको यह घर कैसे मालूम

४५