पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/६३

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दृश्य ३ ]
चाँदी की डिबिया
 

था, वह सब दे दीजिए। मुझे आज किराया देनाहै, वे सब एक दिन के लिए भी न मानेंगे। मैं पहिले ही पन्द्रह दिन पिछड़ गई हूँ।

जैक

मुझे बहुत दुःख है, मैं सच कहता हूँ मेरे जेब में एक कौड़ी भी नहीं है।

[ वह दबी आँखों से बार्थिविक को देखता है ]

अपरिचित

[ उत्तेजित होकर ]

चलिए चलिए, मैं न मानूँगी ये मेरे रुपये हैं और अापने ले लिए हैं। मैं बगैर रुपया लिए घर न जाऊँगी। सब मुझे निकाल दगे।

जैक

[ सिर पकड़कर ]

लेकिन जब मेरे पास कुछ है ही नहीं तो दूँ क्या? मैं

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