पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/८६

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चांदी की डिबिया मिसेज. जिस दिन श्राधी छुट्टी होती है उस दिन अठारह पेंस ही मिलते हैं । बाथि विक और तुम्हारा शौहर तो जो कुछ पाता होगा, पीने में उड़ा देता होगा। जोन्स हाँ साहब, कभी कभी उड़ा देते हैं, कभी कभी मुझे दे देते हैं । अगर उन्हें काम मिले तो करने को तैयार हैं हु.जूर, लेकिन मालूम होता है बहुत से आदमी खाली बैठे हुए हैं। बाथि विक उह ! इन बातों में पड़ने से क्या फायदा [ सहानुभूति दिखाकर ] यहाँ तुम्हारा काम बहुत कड़ा तो नहीं है ? क्यों ? मिसेज, जोन्स नहीं हु.जूर, ऐसा कुछ कड़ा तो नहीं है, हां जब ७८