पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/९३

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अंक २ दृश्य १ [ जोन्स का घर] मरथर स्ट्रीट । समय २॥ ०बजे । कमरे में कोई सामान नहीं है, फटे हुए चिकट कपड़े हैं, और रंगी हुई दीवारें । साफ़ सुथरी दरिद्रता झलक रही है । जोन्स श्राधे कपड़े पहिने चारपाई पर लेटा हुश्रा है। उसका कोट उसके पैरों पर पड़ा हुआ है और कीचड़ से भरे हुए बूट पास ही ज़मीन पर रखे हैं। वह सो रहा है। दरवाज़ा खुलता है, और मिसेज़ जोन्स आती है। वह फटा हुआ काला जाकिट है। सिर पर काली मल्लाहों की सी टोपी है। वह टाइम्स पत्र में लिपटा हुश्रा एक पारसल लिए हुए हैं । पारसल नीचे रख देती है, और उसमें से एक एपरन (वह कपड़ा जो काम करने वाली स्त्रियां गाउन के ऊपर लपेट लेती हैं), आधी रोटी, दो प्याज़, तीन भालू, और मांस का एक छोरा सा टुकड़ा निकालती है। ताक पर से पहिने हुए -