पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/९७

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दृश्य २ ]
चाँदी की डिबिया
 

[ दीवार की तरफ़ मुँह फेर लेता है। ]

तुम इतनी सीधी सादी हो, तुम नहीं जानतीं कि मेरे भीतर कितनी हलचल मची हुई है। मैं इन बच्चों के खेल से तंग आ गया हूँ। अगर कोई उन्हें चाहता है, तो मेरे पास आए,

[ मिसेज़ जोन्स पकाना बद कर देती है, और मेज़ के पास चुपचाप खड़ी हो जाती है। ]

मैं सब कुछ करके हार गया। जो कुछ होनेवाला है, उससे नहीं डरता। मेरी बातों को गिरह बांध लो। अगर तुम समझती हो, कि मैं उनके पैरों पर गिरूंगा, तो तुम्हारी भूल है। मैं किसी से काम न मागूगा चाहे जान ही क्यों न जाती रहे। तुम इस तरह क्यों खड़ी हो जैसी कोई दुखियारी, असहाय मूरत हो? इसी से मैं तुम्हें छोड़ता नहीं। अब तुम्हें काम करने का ढंग आ गया। लेकिन

इतना सीधापन भी किस काम का। तुम्हारे मुंह में तो जैसे जीभ ही नहीं है।

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