पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/९७

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दृश्य ] चांदी की डिबिया [ दीवार की तरफ़ मुंह फेर लेता है। तुम इतनी सीधी सादी हो, तुम नहीं जानतीं कि मेरे भीतर कितनी हलचल मची हुई है । मैं इन बच्चों के खेल से तंग आ गया हूँ। अगर कोई उन्हें चाहता है, तो मेरे पास आए, [ मिसेज़ जोन्स पकाना बद कर देती है, और मेज़ के पास चुपचाप खड़ी हो जाती है। ] मैं सब कुछ करके हार गया । जो कुछ होनेवाला है, उससे नहीं डरता । मेरी बातों को गिरह बांध लो । अगर तुम समझती हो, कि मैं उनके पैरों पर गिरूंगा, तो तुम्हारी भूल है । मैं किसी से काम न मागूगा चाहे जान ही क्यों न जाती रहे । तुम इस तरह क्यों खड़ी हो जैसी कोई दुखियारी, असहाय मूरत हो ? इसी से मैं तुम्हें छोड़ता नहीं । अब तुम्हें काम करने ढंग श्रा । लेकिन इतना सीधापन भी किस काम का । तुम्हारे मुंह में तो जैसे जीभ ही नहीं है । का गया ८९