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चोखे चौपदे

बॉध सुन्दर भाव का सिर पर मुकुट।
वह भलाई के लिये है अवतरा ॥
कौन कवि सा हित-कमल का है भँवर।
प्यार से किस का कलेजा है भरा ॥

है रहा किस मे बसत सदा बना।
नित चली किस में मलय सी पौन है ॥
धार किस में सब रसों की है बही।
कवि-कलेजे सा कलेजा कौन है ॥

एक कवि छोड़ कौन है ऐसा।
प्रेम में मस्त मन रहा जिस का ॥
भाव में डूब धन , उमड़ते लौं।
है कलेजा उमड़ सका किस का ॥

फूल जिस से सदा रहा झड़ता।
मुंह वही श्राम है उगल लेता ॥
क्या अजब, कबि जला भुना कोई।
है कलेजा बला जला देता ॥