पृष्ठ:जायसी ग्रंथावली.djvu/१५८

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( १३८ ) राजा जाइ तहाँ बहि लागा। जहाँ न कोई फंदेसी कागा ॥ तहाँ एक परबत् प्रह डू गा। जहवाँ सब कपूर और गा ॥ जायसी ने चित्तौर से सिंहल जाने का जो मार्ग वर्णन किया है वह यद्यपिा बहुत संक्षिप्त है पर उससे कवि की दक्षिण अथत मध्य प्रदेश के स्थानों की जानकारी प्रकट होती है । चित्तौर से रत्नसेन पूर्व की ओर चेले हैं । कुछ दूर चलने पर जायसी ‘दहिने विदर, चंदेरी बाएँ ' ॥ 'चंदेरीआाज कल ग्वालियर राज्य के अंतर्गत है और ललितपुर से पश्चिम पड़ता है ? बिदर गोलकुंडे के पास वाला सुदूर दक्षिण का बिदर नहीं बल्कि बरार (प्राचीन विदर्भ) १ के अंतर्गत एक स्थान था । जायसी का विदर से अभिप्राय। विदर्भ या बरार से है । रत्नसेन चित्तौर से कुछ दक्षिण लिये पूर्व की ओर चला औौर रतलाम के पास ग्रा निकला जहाँ से चंदेरी बाईं ओोर या उत्तर औौर बरार दक्षिण पड़ेगा। यहाँ से शुक राजा से विजयगढ़ (जो सूवा मालवा के भीतर था । आर जिसका प्रधान नगर विजयगढ़ था) होते हुए ऑौर अंधिया खटोला (होशंगा बाद और सागर के बीच के प्रदेश ) को बाईं या उत्तर 3ोर छोड़ते हुए गोंड़ों के देश गोडवाने में पहुँचने को कहता है सुनु मतकाज चहसि जी साजा। बीजानगर बिजयगढ़ राजा ॥ पहचह जहाँ गोड़ औौ कोला। तजि बाएँ अंधियार खटोला ॥ विजयगढ़ इंदौर के दक्षिण नर्मदा के दोनों ओर फैला हुआा राज्य था। तात्पर्य यह कि रत्नसेन रतलाम के पास से चलकर इंदौर के दक्षिण नर्मदा के किनारे होता हुया हंड़िया या हरदा के पास निकला जहाँ से पूरब जानेवाले को होशंगाबाद (धियार खटोला) उत्तर या बाईं ओोर पड़ेगा। हंड़िया बरार की उत्तरी सीमा पर था औौर बरार के दक्षिण तिलंगाना देश माना जाता था जो आजकल के बरार का ही दक्षिणी भाग है। हंड़िया के उत्तर जबलपुर पड़ेगा जिसके पास गढ़कटक था। अतः इस स्थान पर (हंड़िया के पास ) शुक का कहना बहत ही ठीक है कि दक्खिन दहिने रहह तिलंगा। उत्तर बाएँ गढ़ काटंका ॥ हंड़िया के पास से फिर मागे बढ़ने के लिये तोता इस प्रकार कहता है माँग रतनपुर सिंहद्वारा । झारखंड देइ बाँव पहारा ॥ यहाँ पर कवि ने केवल छंद के बंधन के कारण सिंहद्वारा' छिदवाड़ा) के पहले रतनपुर रख दिया है । ड़िया के पास पूरब चलनेवाले को छिदवाड़ा पड़ेगा । तब रतनपुर जो बिलासपुर जिले में है । । रतनपुर से फिर शुक झारखंड (सरगुजा का जंगल) उत्तर छोड़ते हुए ग्रागे बढ़ने को कहता है । यदि बराबर से भागे बढ़ा १. अकबरी में सूबा दक्षिण ( श्राईने बरार का उत्तर विस्तार हंड़िया मध्य प्रदेश की पश्चिमी सीमा पर नर्मदा के किनरे एक छोटा कसबा) से बिदर तक १८० कोस लिखा है और बरार के दक्षिण तिलंगाना बताया गया है ।