पृष्ठ:जायसी ग्रंथावली.djvu/२०७

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सुना खंड २५ तादिन व्याध भए जिउलेवा । उठे पाँख भा नाँव परेवा ॥ में बियाधि तिसना सँग खाधू । सूने भुगुति, न सूझ बियाध है। हमहि लोभवं मेला चारा । हमह चाहै मारा । गवं हम निचित वह आाव छिपाना । कौन वियाधहि दोप पाना ।। सो ग्रीन कित कोजिएजिड दोज जेहि काज । अब कहना है किछ नहीं, मस्ट भली पेंखिराज ॥ ७ ॥ जेहि पाहाँ = जिस (ईश्वर) से । गिड = प्रीवा, गला । (७) खाध = खाद्य t लौभट्ट = लोभही ने । मस्ट = मौन ।