पृष्ठ:जायसी ग्रंथावली.djvu/८२

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( ६२ ) कवि की यही पारमार्थिक प्रवृत्ति उसे हेतृत्प्रेक्षा की ओर ले जाती है । ऐसा जान पड़ता है, मानो उसी अमराई की छाया से ही संसार में रात होती है और आकाश हरा (प्राचीन दृष्टि हरे और नीले में इतना भेद नहीं करतो थी) दिखाई जैसा पहले कहा जा चुका है, जिन दृश्यों का माधुर्य भारतीय हृदय पर चिरकाल से अंकित चला जा रहा है उन्हें चुनने की सहृदयता जायसी का एक विशेष गुण है । भारत के श्रृंगारप्रिय ह्दयों में निघट का दृश्य' एक विशेष स्थान रखता है। केशवदास ने पनिघट ही पर बैठे बैठे अपने सफेद बालों को कोसा था। सिंहल के पनिघट का वर्णन जायसी इस प्रकार करते हैं पानि भरे श्रावहि पनिहारी। रूप सुरूप पदमिनी नारी ॥ पदुम गंध तिन्ह अंग बसाहीं । भंवर लागि तिन्ह संग फिराहीं । लंक सिघिनी, सारंग नैनी। हंस गामिनी, कोकिल बैनी ॥ श्रावहि झंड सो पाँतिहि पाँती । गवन सोहाइ सो भाँतिहि भाँती ॥ कनक कलसमुख चंद दिपाहीं। रहस केलि सन ग्रावहि जाहीं 11 जा सहूँ वे हेहि चख नारो । बाँक नैन जन हनहि कटारो । केस मेघावर सिर ता पाई। चमकह दसन बी के नाई । पद्मावती का अलौकिक रूप ही सारी नाख्यायिका का आधार है । अत: कवि इन पनिहारियों के रूप की झलक दिखाकर पद्मावती के रूप के प्रति पहले ही से इस प्रकार उत्कठा उत्पन्न करता है माथे कनक गागरी प्राहि रूप अनूप । जेहिके अस पनिहारी सो रानी केहि रूप बाजार के वर्णन में ‘हिंदू हाट' की अच्छी झलक मिल जाती हैर- कनक सब कुछुकुएँ लीपीमाहजन सिंघलदीपी ॥ हाट । बैठ सोन रूप भल भए पसारा। धवल सिरी पोतहि घर बारा ॥ जिस प्रकार नगर हाट के वर्णन से सुखसमृद्धि टपकती है उसी प्रकार गढ़ राजद्वार के प्रतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन से प्रताप औौर श्रातंक निति गढ़ बांचि चले ससि सूरू। नाहि त होइ बाजि रथ चूरू । पौरी नवौ बजे के साजी। सहस सहस तटें बैठे पाजी ॥ फिरह पाँच कोटवार सुभरी। काँपे पाँव चपत वह पौरी ॥ जलक्रीड़ा वन—सिंहलद्वोपवर्णन के उपरांत सखियों सहित पद्मावती की जलक्रीड़ा का वर्णन है (दे० मानसरोदक खंड) । यद्यपि जायसी ने इस प्रकरण की योजना कौमार अवस्था के स्वाभाविक उल्लास औौर मायके की स्वच्छंदता की व्यंजना लिये की है, पर सरोवर के जल में घुसी हुई कुमारियों का मनोहर के द श्य भी दिखाया है और जल में उनके केशों के लहराने ग्रादि का चित्रण भी किया है धरी तीर सव कंचुकि सारी। सरवर सँह पैठीं सब नारी पाइ नीर जानहु सब बेली । हुलसहि कर्राहि काम के केली