पृष्ठ:तिलस्माती मुँदरी.djvu/५४

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तिलिस्माती मुँदरी


झटका दिया कि वह कील समेत नीचे जा पड़ी। उसको झट पट समेट कर और साथ लेकर वह बदज़ात लौंडी वहां से बड़ी फुरती के साथ दौड़ती हुई चली गई; राजा की लड़की को उसी तरह बंधी हुई पड़ी छोड़ गई। अगर उसके हाथ बंधे हुए न भी होते तो भी अब वह वहां से कहीं नहीं जा सकती थी।

लौंडी ने राजा की लड़की को वहाँ इस तरह पाया था- वह उस मकान से कि जिसमें पकड़े हुए लौंडी गुलाम रक्खे गये थे किसी तरकीब से उसी रात को भाग आई थी। और मंदिर के खंडहरों में छुपने को जगह ढूंढ रही थी। ढूंढते में उसे मीनार से लटकती हुई वह रेशमी रस्सी की, सिड्डी दिखाई दी; उस पर वह चढ़ गई यह देखने को कि वह ऊपर कहां लगी हुई है, और जब उसने राजा की लड़की को वहां सोता देखा तो फ़ौरन उसके जी में आया कि उसे राजा के अफ़सरों के हवाले कर दे, क्योंकि अलावा इसके कि वह उसले जलती थी वह यह भी जानती थी कि भागे हुए लौंडी गुलामों के पकड़ लाने वालों और पता बताने वालों को इनाम मिलता है और उसे यकीन था कि राजा को लड़की के मानिन्द उमदा लौंडी को पकड़वाने के इनाम में वह सिर्फ़ भाग आने के लिये मुआफ़ ही नहीं कर दी जायगी बल्कि क़ैद से छोड़ भी दी जायगी।

वह लौंडिया बराबर दौड़ती ही गई जब तक कि उस मकान में न पहुंची जहां कि उसके साथ के लौंडी गुलाम बन्द थे और वहां पहुंच कर दरबान से कहा कि उसे गुलामों के दारोग़ा के पास ले चले; जब वह दारोग़ा के पास पहुंची दारोग़ा उससे बहुत नाराज़ हुआ और भाग जाने के कुसूर पर सज़ा देने को धमकाने लगा, लेकिन वह बीच ही में बोल उठी कि