पृष्ठ:देवकीनंदन समग्र.pdf/५०८

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आजकल इस मकान में कमलिनी की प्यारी रायी तारा रहती है। नौकर मजदूरनी प्याद सिपाही सब उसी के आधी हे क्योंकि वे लाग इस बात को याची जानते है कि कमलिनी तारा को अपनी सगी बहिन से बढ़ कर मानती है और ताराक कह को टालना कदापि पसन्द हो करती भलिही के अनुसार तारा कुछ दिनो तक कमलिनी ही की सूरत बन कर उस मकान में सी और इस बीच में यहा नौकर पाकर को इसकी गुमान भी न हुआ कि फमलिनी कहीं बाहर गई है और यह लारा है बल्कि उन लोगों का यही विश्वास या कि तारा को कमलिनी न किसी काम के लिए मजा है, मगर उस दिन से जब स कापलिनी न मनारमा का गिरफ्तार किया या ओर अप तिलिस्मी मकान में भजवा दिया था तारा अपनी असली सूरत में ही रहती है और समय समय पर कामलिसी के हाल चाल की यर नी उस मिला पारती है। देवीसिह और भूतनाथ को साथ लिए हुए राजा गोणलसिहले जव किशारी और कामिनी को कैद से छुड़ाया था तो उन दाना को भी कमालिनी की इच्छानुसार इसी तिलिस्मी मकामे पहुधा दिया था। पहुधा के समय दीसिह और भूतनाथ को साथ लिए हुए स्वर राजा गोपालसि किशोरी तथा ५ifगी क सग आयशा उस समय का थाधा रग हाल यहा लिराना उचित जान पड़ता है। किशारी और कामिनी को लिए हुए जब राजा गाभारतसिह उस मकान के पास पहुचेतायवर कराके लिए भूतनाथ को तारा के पास भेजा। उस समय तारा किसी काम के लिए कालाव के बाहर आई थी जब उसकी भूतनाथ स मुलाकात हुई। भूताय को देख कार तारा सुश हुई और उससे कालिगो का समामार पूछा जिस स्थान में हनाने उस दिन स जिस दिन कमलिगी तारा रस आखिरी मय शुदा हुई थी आज सम का हाल कह सुनाया जिसमें राजा पापालसिद का नी हाल था और अन्त में यह मो फोnि किशारी और कामिनी का पदभाकर कर्मालनी का इच्छानुसार उन दातों को यहाँ पहुचादों के लिए स्वय गजा गापालसि आर्य है गेही दूर पर है, और तुमसे मिलना पाहत है। तारा इसका गुमान भी था कि राजा गापालसिंह अभी तक जाते है या मायारा ने दियान में है। आज भूतनाथ की जुराग यह हाल सु। करसो के मार तारा की अजब हालत का गई। भूतनाथ न उसके चहर की तरफ दख कर गार किया तो मालूम हुआ कि राजा गापालासकटन को सुगी वापरत कमलिनी के तारा को बहुत ज्यादा हुई बल्कि वह साधने लगा कि शव नहीं कि सुशी के गार तारा की जा मिल जाय और वास्तव में यही यात थी नों तारा के यूबसूरत भोलहरे पर 6ti at दियाई दरसामा मगर सापही हरी से गला फेर लाने को कारण उसकी आवाज सक सी गई थी पा. भृाय सहना पारती थी मगर का नर्स ech a स ओंसुओं की खूद गिर रही थीं और बदाम पल पल भर महलको पपीहा रहा था। जव भूताय तारा की यह लपीता उत्स चालीसा आमगर या पारकर उसन अपन ताज्जुब का दूर किया कि असर एसा भी हुआ करता कि अगर घर के स्वामी र आईकोई बला टल जाती है। पनिरयत सगे रिश्तेदार के तावदारों का विशेष खुशी जाती है। मगर साय पर .il भूत राय की यह हुई कि तारा की इस बढ़ी हुई सुशी को किसी तरह काम करा चाहिए ही It Trjम नहीं इसे किसी पर' का शारीरिक कष्ट पकना पड़े। इसी विचार से भूताय ने तार की तरफ देख कोटा- भूतनाथ-राजा गापालसिह छूट गये सही मगर अर्ग उसकी जिदगी का राम नकारा चाहिये। तारा-(चौक कर) सा क्या सा क्या? भूत--यह बात मै इस विकार से कहता कि मायारानी कुछ 447 जरूर मारे और इसके अतिरेर तमाम रिआया को राजा गोपालसिह के मरन का विस्वास हो चुका है जिस कई त पीत दुक है अब देखना चाहिए उन लोग के दिल में क्या बात पैदा होती और जादा रखा जाएगा अब तुम बिलम्ब न करो वे राह देख रहे होग। भूताय की गतो का जयार का तारा का मौका मिला और 4 किया कुछ कहे भूत के साथ रवाना हुई। राजा गापालसि यहुत दूर न थे इसलिए आधी घड़ी से कमर में तारा पहा पाच गई और उसने अपने ऑखों से गापालसिह किशारी कामिनी और दवासिह को दया। ताराक दिल में राशी का दरिया जोश के साथ लहरे ले रहा था। नि सदे उसके दिल में इतनी ज्याद सुशी थी कि उराक समाi की T अन्दर था और बटुतायत के कारण रोमाघ द्वारा तारा के एक एक रोंगट से खुशी बाहर हो रही थी। सारा के दिल में तरह तरह के ख्याल पैदा हो रहा और वह अपन को बहुत सम्हाल रही थीं। तिस पर भी राजा गोपालसिंह को पास पहुंचते ही वह उनके कदमो पर गिर पड़ी गोपाल-(तारा को जल्दी से उठा कर) तास जाता कि तुम मेरे टूटने की १५ से ज्याद युशी हुई है मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ यास कर इस सबब से कि तुमन कमलिनी का साथ दड़ी नफनीयती और मुहम्मत के साथ दिया और कमलिनी की समय से मरी जान बची रही ता में मर ही चुका था बल्कि यो पाना चाहिए कि मुझे मरे हुए पाँच वर्ष बीत देवकीनन्दन खत्री समग्र