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[ Part I Ch. 4
परमार्थसोपान
2. THE MORAL CHARACTERISTICS OF A
SADGURU.
साधो सो सदगुरु मोहिं भावै ॥ टे ॥
सत्तनाम का भर भर प्याला,
आप पिए मोहिं प्यावै ॥ १ ॥
मेले जाय न महन्त कहावै,
पूजा भेट न लावै ॥ २ ॥
परदा दूर करै आँखिन का,
निज दरसन दिखलावै ॥ ३ ॥
जाके दरसन साहब दरसै,
अनहद सब्द सुनावै ॥ ४ ॥
माया के सुख दुख करि जानै,
संग न सुपन चलावै ॥५॥
निस दिन सतसंगत में राँचै,
शब्द में सुरत समावै ॥ ६ ॥
कह कबीर ताको भय नाहीं,
निरभय पद सरसावै ॥ ७ ॥