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[ Part I Ch. 4
परमार्थसोपान
12. INADEQUACY OF MERE YOGA FOR THE
REALISATION OF GOD.
तो भी कच्चा बे कच्चा,
नहीं गुरू का बच्चा ॥ टे ॥
दुनिया तजकर खाक लगाई,
जाकर बैठा बन मों ।
खेचरि मुद्रा बज्रासन पर,
ध्यान धरत है मन मों ॥ १ ॥
गूपित होके परगट होवे,
जावे मथुरा कासी ।
प्राण निकाले सिद्ध भया है,
सत्य लोक का बासी ॥ २ ॥
तीरथ कर कर उम्मर खोई,
जोग जुगति में सारी ।
धन कामिनि को नजर न लावे,
जोग कमाया भारी ॥ ३ ॥
(Contd. on p. 132 )