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[ Part I Ch. 5
परमार्थसोपान


15. KABIR ON A MYSTIC'S LIFE IN THE REGION
OF SUPERSENSUOUS EXPERIENCE.



महरम होय सो जानै साधो,
ऐसा देस हमारा ॥ टे. ॥

वेद किताब पार नहिं पावत,
कहन सुनन से न्यारा ॥ १ ॥

सुन्न महल में नौबत बाजै,
किंगरी बीन सितारा ॥ २ ॥

बिन बादर जहँ बिजुरी चमकै,
बिनु सूरज उजियारा ॥ ३ ॥

बिना सीप जहँ मोती उपजै,
बिनु सुर सब्द उचारा ॥ ४ ॥

ज्योति लजाय ब्रह्म जहँ दरसे,
आगे अगम अपारा ॥ ५ ॥

कह कबीर वहँ रहनि हमारी,
बूझै गुरुमुख प्यारा ॥ ६ ॥