पृष्ठ:परीक्षा गुरु.djvu/१८२

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परीक्षागुरु.
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बहुत दौलत पैदा की थी इस्समय जिस्तर बहुधा मनुष्य तरह, तरह की बनावट और अन्याय सै औरों की जमा मारकर साहूकार बन बैठते हैं सोनें चान्दी के जगमगाहट के नीचे अपनें घोर पापों को छिपाकर सजन बन्नें का दावा करते हैं धनको अपनी पाप बासना पूरी करनें का एक साधन समझते हैं ऐसा उस्नें नहीं किया था. वह व्यापार मैं किसी को कसर नहीं देता था पर आप भी किसी सै कसर नहीं खाता था, उन दिनों कुछ तो मार्ग की कठिनाई आदि के कारण हरेक धुने जुलाई को व्यापार करनें का साहस न होता था इसलिये व्यापार मैं अच्छा नफ़ा था दूसरे वह वर्तमान दशा और होनहार बातों का प्रसंग समझकर अपनी सामर्थ्य मूजिब हरबार नए रोज़गार पर दृष्टि पहुंंचाया करता था इसलिये मक्खन उस्के हाथ लग जाता था, छाछ मैं और रह जाते थे. कहते हैं कि एकबार नई खानके पन्नेंकी खड़ बाज़ार मैं बिकनें आई परन्तु लोग उस्की असलियत को न पहचान सके और उस्सै ख़रीद कर नगीना बनवानें का किसी को हौसला न हुआ परन्तु उस्की निपुणाई सै उसकी दृष्टि मैं यह माल जच गया था इसलिये उस्नें बहुत थोड़े दामों मैं ख़रीद लिया और उस्के नगीनें बनावाकर भली भांत लाभ उठाया उसी समय सै उस्की जडजमी और पीछै वह उसै और, और व्यापार मैं बढ़ाता गया परन्तु वह आप कभी बढ़कर न चला. वह कुछ तकलीफ़ सै नहीं रहता था परन्तु लोगों को झूंंटी भड़क दिखानें के लिये फ़िजूलखर्ची भी नहीं करता था उसकी सवारी मैं नागोरी बैलोंका एक सुशोभित तांगा था और वह ख़ासे मलमल सै बढ़कर कभी वस्त्र नहीं पहनता था वह अपनें स्थान