पृष्ठ:प्रताप पीयूष.djvu/१८७

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प्यारे मिस्टर चार्ल्स ब्रैडला कहां सिधारे।।
हाय ब्रिटिश बाटिका कल्पतरु जग हितकारी।
कहं ढूढ़ै दुखिया भारत सुत छांह तिहारी॥
को अब तुम बिन इंग्लिशपुर की बड़ी सभा महं।
दृढ़ प्रण धरि लरि लरि पर चरिहै हमरे दुख कहं॥
को बिन स्वारथ दुखियन धीरज दान करन हित।
रुज सज्जा ते उठि ऐहै सागर लांघत इति॥
को हम हित अपने भाइन की सकुच न करिहै।
निहचल निहछल निडर नीति पथ को पग धरिहै।।
यों तो हमरे हितू बनहिं बहुधा बहुतेरे।
पै निज पापी पेट भरन विषयन के चेरे॥
तनिक विघ्न लखि होहिं और के औरहि छिन में।
कहा आस विश्वास करै धारन कोउ तिन में॥
पर उपकारक तुमहिं रहे सत वृत जग माहीं।
जिनहिं न्याय पथ चलत ईश्वरहु कर डर नाहीं॥
हाय हाय रे हाय दिखाय न कोउ अब ऐसो।
दीन हीन देशी न लखै निज कुटुम सरिस जो॥
हाय राम तुम अबहूं दयासागर कहवावत।
दया न आई नेक हमहिं वासों बिछुरावत॥
जाके इक इक सुगुन सुमिरि फाटति है छाती।
हाय ब्रैडला हाय हिन्द के सत्य सँघाती॥
भली आस दै भली रीति सों प्रीति निबाही।