पृष्ठ:बुद्धदेव.djvu/१५५

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(१४२ ) प्रार्थना है । " महाराज शुद्धोदन की यह बात सुन मगवान् बुद्धदेव में उसी समय संघ में इस आज्ञा की घोषणा कर दी कि जो कोई किसी बालक को उसके माता-पिता की आज्ञा और अनुमति के विरुद्ध संन्यास ग्रहण करावेगा, उसे दुष्कृत पाप लगेगा। .