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पृष्ठ:भट्ट-निबन्धावली.djvu/४०

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.२४ । भट्ट-निवन्धावली . है, संसार मे क्या मुंह दिखावे कि इनके इतने बड़े-बड़े लड़की लड़के हो गये कौन-सी कज है जो व्याह नहीं होता । मालूम होता है, जाति मे हेठे हैं । इस लोक-निन्दा की डर से जन्म पर्यन्त सब तरह का क्लेश उठाते हैं अपने प्रौलाद की तरक्की मे हर तरह बाधा पहुंचाते हैं किन्तु यद्यपि शुद्ध लोकविरुद्धं वाली कहावत को चरितार्थ किये जाते हैं। शास्त्र में लिखा है दान पात्र को देना चाहिये । अकिल भी मानती है कि हमारे यहाँ जो बड़े-बड़े दान लिख दिये गये हैं सो इसीलिये कि वे दान योग्यता और विद्या के हिसाब से दिये जायगे तो सस्कृत का अखण्ड पठन-पाठन बना रहेगा, • लोग शास्त्र के अभ्यास में परिश्रम करते रहेंगे और खूसटों के मुकाबिले उनकी विशेष कदर रहेगो, सो अब इस कहावत के अनुसार ऐसा करने से लोक विरुद्ध होता है, जिनको सदा से मानते आये हैं उन्हें कैसे न मानें, चाहे जैसा अपावन और अपाहिज हो बड़े से बड़ा दान पाने का वही अधिकारी है जिसे वाप दादा लीक पीटते आये हैं। इस तरह के दो उदाहरण हमने दिये पर इस कहावत के अनेक उदाहरण श्राप को मिल सकते हैं। तात्पर्य यह है हमारी तरक्की के अनेक विघातकों में ऊपर की यह कहावत भी एक महाविधाता है। सितम्बर १ - - -