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भारत में अंगरेज़ी राज

१० भारत में अंगरेजी राज की रियासत में था। लडलो लिखता है कि इस ज़बरदस्ती के कारण जयपुर के राजा और प्रजा दोनों में गहरा असन्तोष फैल गया और ४ जून सन् १८३५ को लोगों ने रेजिडेण्ट के ऊपर हमला करके उसके असिस्टेण्ट मिस्टर ब्लैक को मार डाला। वास्तव में लॉर्ड बेण्टिङ्क धीरे धोरे इन सभी रियासतों को खत्म करने की तैयारी कर रहा था। मन् १८३१ में लॉर्ड बेण्टिङ्क ने अवध का दौरा किया। अवध के नवाब को, जिस अंगरेज़ उन दिनों "श्रवध का अवध का दौरा का बादशाह' कहते थे, खब डराया धमकाया, और गज के एक एक महकमे में इस प्रकार का अनधिकार हस्तक्षेप और राज के कर्मचारियों में मनमाने उलट फेर करने शुरू किए कि उन दिनों यह एक श्राम अफ़वाह थी, यहाँ तक कि कलकत्ते के समाचार पत्रों तक में प्रकाशित हो गया था, कि अंगरेज़ नवाबी का खात्मा करके अवध की सल्तनत को अपने इलाके में मिला लेना चाहते हैं । नवाब ने घबरा कर इंगलिस्तान की पार्लिमेण्ट से अपील करने का इरादा किया और करनल दूबॉय नामक एक फ्रान्सीली को इङ्गलिस्तान भेजना चाहा । दूबॉय यूरोप के लिए रवाना होगया इस पर बेण्टिङ्क ने नवाब को डरा कर उससे ज़बरदस्ती दूबॉय की बरखास्तगी का परवाना लिखा कर फ़ौरन् विलायत भेज दिया। इस मामले में नवाब और दूबॉय दोनों के साथ बेण्टिक की ज़बर दस्ती और दूवॉय के विरुद्ध उसके षड्यन्त्र का विस्तृत वृत्तान्त एक लेखक ने वेरीटस (Veritas) के नाम से अप्रैल सन् १८४७