पृष्ठ:मानसरोवर भाग 3.djvu/३७

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मानसरोवर विपिन ने उपती हुई नजरों से देखकर कहा~मुझे तो वही स्त्री सबसे अच्छो मालूम होती है जो थाल में फूल रख रही है। वाह री आपकी निगाह! क्या सूरत के साथ तुम्हारी निगाह भी बिगड़ गई ! मुझे तो वह सबसे बदसूरत मालूम होती है।' 'इसलिए कि तुम उसकी सूरत देखते हो और मैं उसकी आत्मा देखता हूँ।' 'अच्छा, यही मिसेज विपिन है ? जी हां, यह वही देवी है।'