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पृष्ठ:मानसरोवर भाग 5.djvu/१३

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मन्दिर

के मुॅह की ओर देखा । मुॅह से निकला—हाय मेरे लाल। फिर वह सूच्छित होकर गिर पड़ी। प्राण निकल गये । बच्चे के लिए प्राण दे दिये। माता,तू धन्य है । तुम-जैसी निष्ठा, तुझा-जैसी श्रद्धा,तुझ-जैसा विश्वास देव- ताओं को भी दुर्लभ है!