पृष्ठ:मानसरोवर भाग 6.djvu/२००

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चकमा २२५ इन्स.-सरकार की निगाह में इज्जत चौगुनी हो जायगी। चन्दू०-(सोचकर ) जी नहीं, गवाही न दे सकूँगा। कोई और गवाह बना लीजिए। इन्स०--याद रखिए, यह इज्जत खाक में मिल जायगी। चन्दूल-मिल जाय ; मजबूरी है। इन्स०-अमन-सभा के कोपाध्यक्ष का पद छिन जायगा। चन्दू०-उससे कौन रोटियों चलती हैं ? इन्स०-चन्दूक का लाइसेंस छिन जायगा । चन्दू०-~-छिन जाय; बला से ! इन्स०--इनकम टैक्स की जाँच फिर से होगी। 10-जरूर कराइए । यह तो मेरे मन की बात हुई । इन्स० -बैठने को कुरसी न मिलेगी। चन्दु०-कुरसी लेकर चाटू ? दिवाला तो निकला जा रहा है । इन्स० -अच्छी बात है। तशरीफ ले जाइए। कभी तो आप पंजे में चन्दू आयेंगे। ( ४ ) दूसरे दिन इसी समय काग्रेस के दफ्तर में कल के लिए कार्यक्रम निश्चित किया जा रहा था । प्रधान ने कहा-सेठ चन्दूमल की दूकान पर धरना देने के लिए दो स्वयसेवक मेजिए । मन्त्री-मेरे विचार में वहाँ अव धरना देने की कोई जरूरत नहीं। प्रधान-क्यों ? उन्होंने अभी प्रतिज्ञापत्र पर हस्ताक्षर तो नहीं किये ? मन्त्री-हस्ताक्षर नहीं किये, पर हमारे मित्र अवश्य हो गये। पुलिस की तरफ से गवाही न देना यही सिद्ध करता है। अधिकारियो का कितना दवाव पड़ा होगा, इसका अनुमान किया जा सकता है। यह नैतिक साहस विचारों में परिवर्तन हुए बिना नहीं आ सकता । -हाँ, कुछ परिवर्तन तो अवश्य हुआ है। मन्त्री-वृछ नहीं, महाशय ! पूरी क्राति कहना चाहिए । श्राप जानते हैं, ऐसे मुआमलों में अधिकारियों की अवहेलना करने का क्या अर्थ है । यह राज- प्रधान-