पृष्ठ:मानसरोवर भाग 6.djvu/५०

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शाप प्राणपण से इसकी रक्षा करता आया था। आश्चर्य है कि इतनी देर तक मेरी स्मृति कहाँ सोई रही। मैंने तुरन्त ही पिस्तौल निकाली और निकट था कि शेर पर वार करूँ कि मेरे कानों में यह शब्द सुनाई दिये, “मुसाफिर, ईश्वर के लिये वार न करना अन्यथा तुझे दुःख होगा । सिंहराज से तुझे हानि न पहुंचेगी।" मैने चकित होकर पीछे की अोर देवा तो एक युवती रमणी आती हुई दिखायी दी। उसके एक हाथ में सोने का लोटा था और दूसरे में एक तश्तरी । मैंने जर्मनी की हूरें और कोहकाफ की परियों देखी हैं, पर हिमाचल पर्वत की यह प्रप्सरा मैंने एक ही बार देखी और उसका चित्र आज तक हृदय-पट पर खिंचा हुआ है । मुझे स्मरण नहीं कि 'रफैल' या 'कारेजियो ने भी कभी ऐसा चित्र खींचा हो । 'बँडाइक' और 'रेमबाह' के आकृतिचित्रों में भी ऐसी मनोहर छवि नहीं देखा । पिस्तौल मेरे हाथ से गिर पड़ी। कोई दूसरी शक्ति इस समय मुझे अपनी भयावह परिस्थिति से निश्चिन्त न कर सकती यो । मैं उस सुन्दरी की ओर देख ही रहा था कि वह सिंह के पास आयी। सिह उसे देखते ही खड़ा हो गया और मेरी ओर सशक नेत्रों से देखकर मेघ की भांति गर्जा । रमणी ने एक रूमाल निकालकर उसका मुंह पोछा और फिर लोटे से दूध उड़ेलकर उसके सामने रख दिया । सिंह दूध पीने लगा। मेरे विस्मय की अब कोई सीमा न थी। चकित था कि यह कोई तिलस्म है या जादू । व्यवहार-लोक मे हूँ अथवा विचार-लोक मे सोता हूँ या जागता । मैने बहुधा सरकसों में पालतू शेर देखे हैं, उन्हे काबू में रखने के लिए किन- किन रक्षा-विधानों से काम लिया जाता है ! उसके प्रतिकूल यह मामाहारी पशु उस रमण' के सम्मुख इस भाति लेटा हुआ है मानों वह सिंह की योनि में काई मृग-शावक है । मन में प्रश्न हुअा, सुन्दरी मे कौन-सी चमत्कारिक शक्ति है जिसने सिंह को इस भाँति वशीभूत कर लिया है ? क्या पशु भी अपने हृदय में कोमल और रसिक-भाव छिपाये रखते हैं १ कहते हैं कि महुअर का अलाप काले नाग को भी मस्त कर देता है। जब ध्वनि में यह सिद्धि है तो सौन्दर्य की शक्ति का अनुमान कौन कर सकता है। रूप-लालित्य संसार का सबसे अमूल्य रत है, प्रकृति के रचना-नैपुण्य का सर्वश्रेष्ट आदर्श है। जय सिंह दूध पी नुका तो सुन्दरी ने रूमाल उसका मुँह पोछा और - ५