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रहीम-कवितावली।
५—उत्कण्ठिता।
मध्या-उत्कण्ठिता—
जोहत[४] परी पलँगिआ, पिय कै बाट।
प्रौढ़ा-उत्कण्ठिता—
पिय-पथ हेरति गोरिआ, भो भिनुसार[५]।
परकीया-उत्कण्ठिता—
उठि-उठि जात खिरकिआ, जोहन बाट।
गणिका-उत्कण्ठिता—
कढ़ि न नींद भिनुसरवा, आलस पाइ।
६—बासकसज्जा।
मुग्धा-बासकसज्जा—
हरुए[६] गवन नबेलिआ, डीठि बचाइ।