पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१०४

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क्रसे की बीमारी। ८8 में हुई है अथवा ये जो भाँति भाँति के थावर, जद्दम, मनुष्य, पशु पक्षी आदि देख पड़ते हैं, यही क्या हैं ? हम लोग पहले क्या थे ? कहाँ से किस तरह आये ? वह कौन सी गुप्तशक्ति है। जो इन विचित्र पदार्थों की रचना कर के एक अद्भुत कला दिखला रही है ? मैंने मन ही मन सोचते सोचते यह निश्चय किया कि वह शक्ति ही परमेश्वर है, वही संसार का कर्ता हर्ता सब कुछ है । उसके इशारे पर, उसके भृकुटिविलास पर संसार क के सभी काम हो रहे हैं । यह विचारपरम्परा उत्तरोत्तर मेरे मन में अपना घर बनाने लगी ।मैं चिन्ता से व्याकुल हो उठा और दीवार के सहारे धीरे धीरे अपने घर की ओर चला। घर के भीतर आ कर मैं बिछने पर लेट रहा। तब भी मुझे नींद न आई । मैं कुरपी पर बैठ कर सोचने लगा, कल फिर बुखार चढ़ेगा। जी में अत्यन्त डर लगा । एकाएक मुझे यह बात याद हो आई कि ज़िल के लोग किसी औषध का सेवन नहीं करते। सभी रोगों में उनका एकमात्र औषध है तम्बाकू । मेरे साथ भी थोड़े से तम्बाकू के पत्ते थे। मैं सचमुच ही भगवान के द्वारा प्रेरित हो कर दराज़ के पास गया । दराज़ खोलने पर मुझे देह और मन का औषध एक ही साथ मिला । दराज़ से तम्बाकू और एक धर्मशास्त्र बाइबिलका ग्रन्थ ले कर मैं टेबल पर, जहाँ चिराग रक्खा . ॥ था, आया । तम्बाकू से ज्वर की चिकित्सा किस तरह की जाती है, यह मैं न जानता था। और तम्बाकू की इस आसुरी चिकित्सा से मेरे घर में फ़ायदा होगा या नुकसान, इसका भी मैं कुछ निर्णय न कर सका तो भी मैंने अनेक उपायों से तम्बाकू सेवन करने का संकल्प किया । कैसा ही