पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१०६

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क्रूसे की बीमारी। ३१ धरती में घुटने टेक कर भगवान से प्रार्थना की । अपने जीवन में भक्तिपूर्वक आज ही मैंने ईश्वर से क्षमा माँगी । ईश्वररा- . राधन के बाद तम्बाकू से मिली हुई शराब के मुंह में डाला । वह ऐसी कड़वी और तेज़ थी कि बेटी नहीं जाती थी। किसी किसी तरह घोट कर सो रहा । पीछे रात में कहीं कोई आवश्यकता हो, इस कारण चिरागु को न बुझाया। उसे जलता ही रहने दिया। तम्बाकू का नशा धीरे धीरे मेरे सर्वाह्न में फैल गया । मैं शीघ्र ही गाढ़ी नींद में सो गया । जब मेरी नींद टूटी तब तीन बजने का समय था। मालूम होता है, दो दिन दो रात तक बरबर लेकर आज तीसरे दिन तीसरे पहर मेरी नींद खुली । कारण यह कि कई वर्ष बाद मैंने देखा कि तारीख़ की गणना में एक दिन न मालूम कैसे घट गया था । चते सेचते मैंने इस बात का पता लगाया कि तम्बाकू के नशे में सारी रात सेकर दूसरे दिन भी मैं दिनरात सोता ही रहा और तीसरे दिन तीसरे पहर में मेरी आंख खुली । बेहोशी के कारण यह बात उस समय मेरी समझ में न आई । तीसरे दिन को मैं दूसरा दिन समझ बैठा । इसीसे तारीख़ में एक दिन की कमी हो गई। जो हे, जब मैं जाग उठा तब शरीर हलका मालूम होने लगा और मन भी बहुत प्रसन्न और फुरतीला था। मैं उठकर . खड़ा हुआ तो देखा कि पूर्व दिन की अपेक्षा शरीर में कुछ ताकत मालूम हुई और भूख भी इसके दूसरे दिन भी ज्वर न हुआ बल्कि तबीअत बहुत अच्छी थी । आज २४ वीं तारीख़ है । तीसवीं जून—वाज बुखार के आने का दिन न था । में बन्दूक लेकर बाहर गयापर बहुत दूर न जा सका है, मैं हंस