पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१४३

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राबिन्सन क्रूसो ।

१२६ राबिन्सन क्रसे। गई है, एक बार इस द्वीप के चारों ओरपरिक्रमा कर के देहँगा। मेरे राज्य में कहाँ क्या है, कहाँ तक उसकी सीमा , इसे भी देचूंगा। इसके लिए मैं नाव पर आवश्यक वस्तुओं का आयोजन करने लगा। पहले उस पर एक मस्तूल लगाया । जहाज़ के पाल के टुकड़े से एक पल तैयार किया । नाव के अगले हिस्से में और आधप्रदेश में खानेपीने को चीजें रखने के लिए दो बक्स बनाये । नाव के ऊपर छपी तो थी नहीं, इसलिए छतरी ही को तान कर छपरी की तरह खड़ा कर दिया । इस प्रकार सब सामान दुरुस्त कर के मैं नाव को समुद्र के किनारे किनारे ले चला। समुद्र में दूर तक जाने का साहल न होता था । एक दिन अपने राज्य की सीमा देखने की इच्छा हुई । मैंने खानेपीने की सब सामग्री नाव में रख ली । दो दर्जन जौ की रोटियाँ, एक हाँड़ी भर भूने चावल ( आजकल मैं इसी खाद्य को ज़्यादा पसन्द करता था, ) एक घड़ा पानी, बन्दूक और बिछौने के लिए दो एक कपड़े ले लिये । मैं अपने राजत्व या द्वीपान्तरवास के छठे साल अपनी काष्ठ-आखित तिथि-गणना के अनुसार छठी नवम्बर के द्वीप देखने के लिए नाव पर सवार हुआ। जितना रास्ता चलने की आशा की थी उससे कहीं अधिक मार्ग मुझको चलना पड़ा । द्वीप बहुत बड़ा न था । किन्तु द्वीप के पूरब और समुद्र के भीतर दो मील तक पहाड़ और पत्थर की बड़ी बड़ी चट्टानें थीं जिनमें कितनी ही पानी के ऊपर निकली थीं और कितनी ही डूबी थीं । उसके सामने समुद्र की ओर आाध मील चौड़ा।