पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१५०

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छाग-पालन । १३३ करना होगा जिसमें बड़े होने पर ये जंगल में न भाग जाएँ या मेरी बोई हुई फसल को उजाड़ न दें । एक मनुष्य के लिए एक चरागाह का घेरा लगांना कुछ सहज काम नहीं है । किन्तु मुझे जब यह काम करना ही होगा तब बहुत सेचने से क्या होगा १ मैं ऐसी उपयुक्त जगह ढूंढने लगा जहाँ अच्छी हरियाली, पीने योग्य जल और विम लेने के लिए वृक्ष की छाया हो । बहुत खोजने पर एक जगह मिल गई । उपयुक्त जगह मिल जाने से मैं बहुत खुश हुआ और दे दा मील के विस्तार को घेरना शुरू किया । बकरी के इने गिने तीन बच्चों के लिए दो मील चरागाह की बात सुन कर सभी लोग हंसेंगे। दो मील का घेरा देना उस समय मेरे लिए कोई बड़ी बात न थी, क्योंकि तब मेरा ऐसा ही खच्छन्द समय था कि मैं दस मील का घेरा भी मज़ में दे सकता था । किन्तु उस समय मेरे ध्यान में यह बात न आई कि इतनी लम्बी चौड़ी जगह में बकरों को छोड़ देने पर जरूरत के समय उनका पकड़ना कठिन होगा । वे जैसे वन में हैं वैसे ही यहाँ भी खतन्त्र हो जायेंगे । अन्दाज़न पचास गज़ का घेरा दे चुकने पर मेरे ध्यान में यह बात आई । तब मैंने डेढ़ सौ गज़ लम्बा और सौ गज़ चौड़ा स्थान घेरने का विचार किया । पीछे ज़रूरत होगी तो घेरे को बढ़ा कर चरागाह का क्षेत्रफल और भी बढ़ा हूँगा । इस समय मैंने बड़ी बुद्धिमानी का काम किया। घरा देने में तीन महीने लगे। जब चारों ओर से जगह घेरी जा चुकी " तब मैंने बकरी के बच्चों को उसके भीतर छोड़ दिया। मेरे