पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१५१

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है
१३४
राबिन्सन क्रूसो ।

१३४ राबिन्सन क्रसे। हाथ से दाना खा खाकर वे ऐसे पालतू हे। गये थे कि चररा गाह के भीतर भी वे मिमियाते हुए मेरे पीछे पीछे चलते थे। एक साल के भीतर छोटे बड़े सब मिला कर मेरे पास बारह बकरियाँ और बकरे हुए। तीसरे साल में तालीस हो गये । तब मैंने चरागाह के पास ज़मीन के पाँच टुकड़ों को रा और एक से दूसरे में जाने का दवाज़ा बना दिया। अब मुझे मांस की कमी तो रही ही नहीं, प्रत्युत यथेष्ट दूध भी मिलने लगा। दूध मिलने की संभावना पहले चित्त पर न चढ़ी थी, पीछे जब इसका ख़याल हुआ तब मन में जो आनन्द हुआ उसका क्या पूछना है । उन बकरियों से पाँच सात और दूध प्रतिदिन मिलने लगा । यद्यपि मैंने इसके पूर्व कभी दूध नहीं दुङहा था और दूध से मक्खन कैसे निकाला जाता है यह भी नहीं देखा था, तथापि प्रकृति ही विशेष शिक्षा देती है और अभाव ही नवीन कल्पना का उत्पादक होता है । अनेक बार विफल प्रय न होने के बाद मैंने दूध से मक्खन और समुद्रजल से नमक निकालना सीखा। एक दिन मैंने एक पहाड़ के ऊपर नमक की खान देखी । तब मुझे नमक का भी कष्ट न रहा । ईश्वर का विधान बड़ा करुणपूर्ण है । उन्हें कैदी भी धन्यवाद देते हैं । असह्य दुःख को भी वे मधुमय बना देते हैं । मुझ सकुश पापिष्ठ के लिए भी उन्होंने इस निर्जन द्वीप में भाँति भाँति के खाद्य पदार्थों का संग्रह कर रक्खा है । इस समय में ही मानों इस द्वीप का राजाधिराज हैं। मेरी प्रजा का जीवनमरण मेरे ही हाथ में है । मैं अपनी सजा को मार भी सकता और रख भी सकता हूं। मैं जब