पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१५२

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खेती । १३५ । राजा की भाँति भोजन करने बैठता था तब मेरे भ्रय मुके घेर कर बैठते थे । उनमें छात्माराम मेरा विशेष सम्माना स्पद था । मेरे साथ बातें करने की आज्ञा एक उसी को थी। वह एक मेरा मुंहलगा मुसाहब था। मेरा अत्यन्त जीर्णशीर्ण कुता सामने और दो बिल्लियाँ दोनों बगल में बैठ कर प्रसाद पाने की अपेक्षा करती थीं। इस समय एक प्रगभ वक्ता साथी को छोड़ मुझे और किसी वस्तु का अभावजनित कष्ट न था। ये वे बिल्लियाँ नहीं हैं जिन्हें मैं जहाज़ पर से ताया था । ये उन्हीं में के एक के बच्चे हैं । वे दोनों तो मर गईं। उनके बहुत बच्चे हुए थे, जिनमें ये दोनों तो पल गये और सब बदले हो गये । पीछे से वे बड़ा उत्पात करने लगे। छिप कर घर की चीजें खा जाते थे और कितनी ही वस्तुओं को नष्टभ्रष्ट कर डालते थे। तब मैं निरुपाय होकर उन पर गोली चलाने लगा। कई एक के मरते ही अवशिष्ट आप ही भाग गये । मैं इस समय बेखटके शान्त भाव से निवास कर रहा हूं । खेती मैं अपनी नाव के लिए अधीर हो उठा था, परन्तु उसके लिए फिर मैं विपत्ति में पड़ना भी नहीं चाहता था। अपनी डॉगी को देखने के लिए दिन दिन मेरी उत्सुकता बढ़ने लगी । आखिर मैंने स्थल मार्ग से उस नदी के मुहाने तक जाने का विचार किया जहाँ वह नाव बँधी थी । मैं किनारे किनारे चला। जिस स्वरूप से मैं रवाना हुआ, उस शकल में यदि कोई मुझे देखता तो निःसन्देह वह बहुत डरता या हंसते हँसते लोट पोट हो जाता। मैं आप ही अपने को हैक कर हंसी • न रोक सका। मेरे चेहरे का नमूना इस तरह था, .