पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१५५

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राबिन्सन क्रूसो ।

१३८ राबिन्सन कू ली। मनुष्य के पैर का चिह्न था। पैर की उंगलियाँ तलुवा और खेड़ी आदि प्रत्येक अंश का स्पष्ट चिह्न विद्यमान है । मैं किसी भी तरह निर्णय न कर सका कि यह पदचिह्न यहाँ कैसे पड़ा । में हतवृद्धि हो चिन्ताकुल चित्र से अपने किले में भाग आया । म उतना दूर कैसे आयाचल कर या उड़कर १ उस समय इसका मुझे कुछ शान न था। दो तीन डग आगे चलता था, फिर पीछे की ओर घूम कर देखता था, कि कोई आ तो नहीं रहा है । प्रत्येक पेड़ पौधे के पास जाते ही मेरा कलेजा काँप उठता था । दूर से पेड़ के तने को देख कर मुझे मनुष्य का भ्रम होता था। जब मैं अपने किले के भीतर पचा तब मेरी बुद्धि ठिकाने आई । में किस रास्ते से गया था और किस रास्ते लौटकर किले के भीतर पहुँचा—यह कुछ मुझे याद न था । मैं भय से ऐसा घबरा गया था कि मुझे तन मन की भी कुछ सुध न रही। उस रात को मुझे नींद नहीं आई । मैं रात भर भय का काल्पनिक चित्र देखता रहा । आदत हास्यजनक चिन्ता तरह तरह से चित्त के मथित करने लगी । आख़िर में यह सोच कर निश्चित हुआ कि किसी असभ्य जाति की डोंगी शायद तीक्ष्ण धार में पड़कर या हवा की झोंक से किनारे पर आ - लगी होगी, उसके बाद वे लोग इस निर्जन द्वीप के स्थलमार्ग से चले गये होंगे । इस भावना का मन में उदय होते ही मैंने भगवान को धन्यवाद दिया कि कुशल हुआ, मैं उस समय वहाँ से उपस्थित न था ; और यह भी अच्छा ही हुआ कि उन