पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१५६

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श्रपरिचित पद-चिन्ह्

अपरिचित पदचिह्न । १३ड लोगों ने मेरी नौका नहीं देखी, देखते तो वे इस द्वीप में मनुष्य की बस्ती का अनुमान करके ज़रूर मु ढूंढ़ते । तब नौका ही मेरी दुर्भावना का कारण हो उठी। असभ्य लोग यदि नौका देख कर मेरा पता लगानें तो वे मुझे मार कर । खाही डालेंगे । यदि उन्हें मेरा पता न भी लगेगा तो भी वे मेरी खेतीबारी को नष्ट करके और बकरों को भगाकर चले जयगे । तब मैं खाने के बिना ही महँगा । अब मेरे मन में चैतन्य हुआ । अब तक मैं साल भर के खर्च लायक अनाज उपजा कर ही यथेष्ट समझता था। भविष्य के लिए कुछ भी संचय नहीं रखता था । मानों मेरी ज़िन्दगी में कभी दुर्भिक्ष का समय आवेद्दीगा नहीं । मैंने अपनी इस मूर्खता के लिए अपने को धिक्कार दिया और भविष्य में अब दो-तीन साल के लिए खाद्य सामग्री संचय करने का संकल्प किया। मनुष्य का जीवन भगवान् की विचित्र रचना का बड़ा ( : अनोखा नमूना है ! घटना के साथ साथ मनुष्य के मानसिक भाव का बहुत कुछ परिवर्तन होता है । जो आज अच्छा , f लगता है वही कल बुरा मालूम होता है । जिसको कल देखने के लिए आज जी तरसता है उसीको पर देख कर डर लगता है । मनुष्य का साथ छूट जाने से इतने दिन तक मैं उद्विग्न था, आज मनुष्य के पैर का एक मात्र चिह्न देख कर भय से पागल हो उठा हूं। मनुष्य का जीवन ऐसा ही विषम है। अब मैंने बखूबी समझ लिया कि इस निर्जन द्वीप में अकेले ही रह कर मुझे जीवन व्यतीत करना हेगा—यही ईश्वर को मंजूर है । ईश्वर कब क्या करेंगेयह जानने का सामथ्र्य - • मनुष्य में नहीं है । इतने दिन तक मैंने यही समझ रखा था ,