पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१६९

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राबिन्सन क्रूसो ।

१२ राबिन्सन क्रूसो। इसे यहीं पड़ा रहने दो। यदि कोई साहस कर के भीतर आवेगा तो मेरी ही भाँति भयभीत होगा। मैंने अब स्थिर होकर अच्छी तरह देखा। गुफा बहुत बड़ी न थी, ज़्यादा से ज़्यादा भोतर का विस्तार बारह फुट होगा। वह न गोल थी न चौकोर, उसका कोई निर्दिष्ट आकार न था। गुफा के एक तरफ़ एक पतली सुर थी । कौन जानेवह कहाँ कितनी दूर तक गई है । आज मेरे पास बत्ती न थी, इससे आज उस भोतर न गया। कल बत्ती और चकमक साथ में लेकर इसमें प्रवेश कहूँगा । इसके भीतर घुटनों के बल जाना होगा । दूसरे दिन अपने हाथ से बकरे की चर्बी की बड़ी बड़ी छः बत्तियाँ बनाईं। उन्हें साथ ले कर मैं गुफा के भीतर गया और घुटनों के बल सुरहू में घुसा । लगभग दस गज़ भीतर घुस कर मैंने सोचा, कैन जाने में कहाँ जा रहा हूं । कुछ और आगे बढ़ने पर सुरकुंडू की छत ऊँची देख पड़ी । मैंने खड़े होकर देखा, कि एक छोटी सी कोठरी है, ऊँचाई आन्दा ज़न बीस फुट होगी । मैंने वहाँ के विलक्षण दृश्य देखा, वैसा कभी कहीं न देखा था । इस गुफा की दीवार और छत से मेरी बत्ती के प्रकाश का लाख गुना प्रत्यालोक मेरे चारों ओर प्रतिफलित होने लगा । वह बड़ा उज्ज्वल और - विचित्र था । बड़ा अद्भुत चमत्कार था । दीवारों में हीरे जड़े थे या लेने के पत्तर मढ़े थेकुछ मालूम न हुआ । यडू कोठरी बड़े आराम को थी। नीचे की जमीन खूब सूखी और साफ़ थर बीच में पत्थर के टुकड़े बिछे थे। कहीं पक भी कीड़ामकोड़ा न था । यहाँ मेरे लिए एक मात्र प्रवेश