पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१७२

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


द्वीप में असभ्य । १५५ थीं उन्हें जिले के भीतर रख दिया, जिसमें किसी को यह न मालूम हो कि यहाँ कोई आदमी रहता है । फिर भीतर जाकर बाहर की सीढ़ी खींच ली। अब मैं कुछ स्थिर होकर आात्मरक्षा का प्रबन्ध करने लगा । बन्दूकों को भरा और किले की दीवार से सटा कर रख दिया। अब मैं ईश्वर से सहायता की प्रार्थना करने लगा िमें जिले के भीतर दो घंटे किसी तरह बैठा, फिर बाहर की खबर लेने के लिए व्यग्र हो उठा । मेरे पास चर तो था नहीं जिसे जासूसी के लिए भेजता । कुछ देर और अपेक्षा करके सोढ़ी ल गा कर पहाड़ के ऊपर ठहराव की जगह उतर आया। फिर सीढ़ी को पहाड़ से लगा कर उसकी चोटी पर चढ़ गया । वहाँ लेट कर स्थिर दृष्टि से आग के चारों ओर नौ असभ्य बैठे हैं, जो सब के सब नंगे हैं । ऐसा जान पड़ा जैसे वे लोग राक्षसीवृत्ति के चरितार्थ करने के लिए मनुष्य का मांस पका रहे हों। उन लोगों के साथ दो डोंगियाँ थीं । दोनों को खींच कर उन्होंने बालू के ऊपर ला रक्खा है । अभी भाटा था, शायद ज्वार आने पर नाव को बहा कर ले जाने की अपेक्षा से वे लोग बैठे हैं। पीछे उन लोगों को अपने घर की ओोर और इतने सन्निकट आते देख कर मैं तो भय से सूख कर काठ हो गया। किन्तु इतना मैं समझ गया कि वे लोग भाटा पड़ने के समय आाते हैं और ज्वार आते ही चल देते हैं । इसलिए ज्वार के समय मैं खूब निश्चिन्त होकर खेतीबारी का काम कर सऊंगा । यह सच और मैं खुश हुआ। ज्वार आने के एक आध घंटा पहले ही से वे लाग आग की परिक्रमा कर के नाना प्रकार के अडू विक्षप के साथ