पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१७४

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द्वीप के पास जहाज़ का डूबना। १५७ खूब अच्छी नींद नहीं आती थी । मैं भयडूर स्वप्न देख कर चैक उठता था। य ही महीने पर महीना बीतने लगा। । द्वीप के पास जहाज़ का चूना क्रम क्रम से मई महीना आया । उस दिन सेलहवीं तारीख थी । मेरी काठ की यंत्री की गणना से यही ठीक था। दिन भर ऑधो के साथ साथ पानी बरसता रहा । रात में भी हवा का वेग कम न हुआ। वनविद्युत् का प्रभाव भी ज्यों का त्यों बना रहा । मैं बैठ कर बाइबिल पढ़ रहा था। एकाएक समुद्र में तोप का धड़ाका सुन कर मैं चकित हुआ। मैं आश्चर्यान्वित हो कर झट अपने आसन से उठ बैठा । सीढ़ी के सहारे पहाड़ की चोटी पर चढ़ कर मैंने देखाजिस तरफ़ स्रोत के प्रखर वेग में पड़ कर मेरी नाव बह चली थी उसी ओर आग की झलक दिखाई दी । मैंने निश्चय किया कि वहीं से तोप की आवाज़ आई है । यथार्थ में थी भी यही बात। आध मिनट के बाद फिर तोप का शब्द सुन पड़ा । ई जहाज़ तूफ़ान में पड़ कर साहाय्य का संकेत कर रहा है । मेरी समझ में झट एक बात आई मेरे आस पास वहाँ जितनी सूखी लकड़ियाँ थीं सब को मैंने इकट्ठा किया और चकमक से आग बना कर उसमें बत्ती लगा दी। आग लगते ही बल उठी । ऐसा करने का मेरा यह अभिप्राय न था कि मैं उस जहाज़ की कुछ सहायता कर सकेंगी । मेरा इरादा तो यह था कि वही शायद मेरी कुछ सहायता कर सके । मेरे ारा प्रज्वलित आाग का प्रकाश जहाज़ के लोगों ने देख २ लिया । मेरी आग की ज्वाला ऊपर की ओर उठते ही पहले । ।