पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१८९

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राबिन्सन क्रूसो।


६ह ऐसी पैनी होती है कि एक ही हाथ में बेखटके गला काट सकती है ।

दुश्मन का सिर काट कर वह मारे खुशी के उछलने लगा। विचित्र ढंग से अङ्ग विक्षेप करते, नाचते हुए उसने तलवार और कटे सिर को मेरे सामने लाकर रख दिया। फिर उसने उस निहत मनुष्य के पास जाने की अनुमति चाही। मैंने कह दिया, जाओ। वह उसके पास जाकर चुपचाप खड़ा हो रहा, तदनन्तर उसे उल्टा पलट कर देखने लगा । उसके हृदय के पास जहाँ गोली लगी थी उस जगह को उसने बड़े ध्यान से देखा । किन्तु मैंने उसे किस तरह मारा, यह कुछ भी उसकी समझ में न आया। तब वह उसका धनुषबाण उठा कर मेरे पास ले आया। अब मैंने उसको अपने साथ चलने ने का इशारा किया, और उसको समझा दिया कि इन दोनों की तलाश में और लोग भी आ सकते हैं। तब उसने भी संकेत के द्वारा अपने मन का भाव व्यञ्जित किया कि इन मुर्दो को बालू में गाड़ देना अच्छा होगा इससे कोई देख न सकेगा। मैंने गाड़ने की अनुमति दी। उसने तुरन्त हाथ से बालू हटा कर पन्द्रह मिनट के भीतर दोनों मुर्दो को बालू के नीचे छिपा दिया। तब उसको मैं अपनी नई गुफा में ले गया। वहाँ जाकर मैंने उसको रोटी, किसमिस और पानी पीने को दिया । उसको बड़ी भूख और प्यास लगी थी। दौड़ने से थक भी गया था । मैंने एक जगह धान का पयाल बिछा कर बिछौना, बना लिया था, वही दिखा कर उसको लेटने के लिए कहा । वहीं जाकर वह लेट रहा और सो गया।