पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२२७

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है
२०६
राबिन्सन क्रूसो ।

२०६ राबिन्सन क्रूसा ।। आहत हो गया । वह खुब ज़ोर से चिल्ला कर साथियों को पुकारने लगा। कप्तान ने आगे बढ़ कर कहा, “अब साथियों को न पुकार कर भगवान् को पुकार जिससे तेरा कल्याण हो । अब तुझे समय नहीं है। यह कह कर उन्होंने बन्दूक के कुन्दे से उसे ऐसा मारा कि वह गिर पड़ा और कुछ न बोला । वहाँ तीन आदमी और थे, उनमें एक आदमी कुछ घायल हो गया था। मेरे वहाँ पहुँच जाने पर वे लोग अपने के निरुपाय देख दयाभिक्षा माँगने लगे। कप्तान ने कहा–यदि तुम लोग मेरे विश्वासी और अनुगत होकर रहने की प्रतिज्ञा करो ते मैं तुम लोगों का अपराध क्षमा कर सकता हूँ। उन लोगों ने अपने किये अनुचित कर्म के लिए अनुताप कर के भविष्य में भलमनसाहत के साथ रहने की शपथ की। तब हम लोगों ने उनकी जान बख्श दी। पर अभी उन के हाथ-पैर बाँध रखने का मैंने आदेश किया। | हम लोग जब इधर ये काम कर रहे थे तब फ्राइडे और कप्तान का मेट जा कर डाँगी का पाल, पतवार आदि सभी वस्तुए उठा कर ले आये । प्रतिपक्षियों के तीन मनुष्य बन्दूकों की आवाज़ सुन कर धीरे धीरे हम लोगों के पास आये । यहाँ कप्तान को जयी देख कर उन लोगों ने आप ही बन्दी होनास्वीकार किया। अब मुझ से कप्तान का परिचय होने लगा। पहले मैंने अपने जीवन का समस्त इतिहास सुनाया। उसने विस्मित हो कर आदि से अन्त तक मनोयोगपूर्वक सुना और मेरा इतिहास उत्तरोत्तर अद्भुत घटना से भरा हुआ जान कर उसका हृदय द्रवित हो उठा ।उसकी आँखों से आँसू बह चले । वह कुछ बोल न सका । तब मैं उन सबों को अपने घर