पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२४६

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लू से का रूख देश-प्रत्यागमन और धनलाभ । २२३ पहुँचा। मेरा परम भक्त फ्राइडे बराबर मेरे साथ रहा । लिस बन पहुंच कर मैंनेबहुत ढूंढ़ने पर , अपने कप्तान का पता पाया। इन्होंने मुझको आलिका के उपकूल में जहाज़ पर चढ़कर ब्रेज़िल पहुँचा दिया था। वे अब बूढ़े हो गये थे। उनका सयाना बेटा ज़िल जानेआने वाले जहाज़ का कप्तान था । वृद्ध मुझको पहचान न सके । मैं भी पहले उनका परिचय न मिलने से उन्हें पहचान न सका। मैंने अपना परिचय देकर उन्हें मुहत की बात का स्मरण करा दिया। प्रथम मिलन के प्रणयसूचक कुशलप्रश्न होने के बाद मैंने उनसे अपनी खेतीबारी का हाल पूछा । उन्होंने कहा-‘नों वर्ष से हम ज़िल नहीं गये । जब गये थे तब तुम्हारे कार- परदाज़ को जीवित देख आाये थे । किन्तु जिन दो व्यक्तियों के तुम अपनी सम्पत्ति सौंप आये थे वे मर गये हैं ।' मेरा धन इस समय करीब करीब गवर्नमेन्ट ने अपने हाथ में कर लिया है । मैं या मेरा कोई वारिस यदि उस धन का दावेदार खड़ा न होगा ते कितना ही अंश सरकार जब्त कर लेगी और कुछ धमकायं में खर्च कर देगी । अभी मैं या मेरी ओर से और केई वहाँ जाय ते मुझे अपनी सारी सम्पत्ति मिल जायगी । इस समय मेरे अंश की सालाना आय तीन-चार हज़ार रुपये हे। सकती है । मैंने वसीयतनामे में इन्हीं कप्तान को अपनी सम्पत्ति का उत्तराधिकारी नियत किया था। किन्तु मेरे मरने की सच्ची खबर न पाने के कारण कप्तान के अब तक मेरी सम्पत्ति नहीं मिली । केवल उन्हें पिछले कई सालों का मुनाफा मिला है । उन्होंने मुझको सब हिसाब दिखला दिया और यह भी कहा कि तुम्हारे रुपयेां से हमने जहाज़ का अंश : खरीद लिया है। इस समय उनकी अवस्था ऐसी न थी कि !