पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२५१

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राबिन्सन क्रूसो ।

२२८ राबिन्सन क्रूसो। लगा । पर किसी तरह जलपथ से जाने को मैं राज़ी न हुआ। अन्तःकरण के इःित को सदा मानना चाहिए। मैंने जिन दो जहाज़ों पर जाने की बात ठीक की थी उनमें एक को तो रास्ते ही में किसी लुटेरे जहाज़ ने गिरफ्तार कर लिया और दू सरा कुछ दूर जाकर टूट गया । यदि मैं इन दोनों में से किसी पर सवार होता तो फिर भारी संकट में पड़ता। मैंने स्थलमार्ग से ही जाना स्थिर किया। अद्ध पोर्टेगीज़ कप्तान ने मुझे एक साथी ढ़ दिया । वह लिसबन के एक अँगरेज व्यवलायी का बेटा था । वह भी हंगलैंड जायगा। इसके बाद दो अँगरेज और दो पोर्टेगीज़ भी आ मिले । अब हम लोग छः यात्री हुए । साथ में पाँ व नौकर थे । सब मिला कर ग्यारह आदमी हुए । हम लोगों ने अशस्त्रों से लैस हो घोड़े पर सवार हो लिसबन से यात्रा की । एक तो मैं सब से उम्र में बड़ा था, दूसरे साथ दो नौकर थे। इसके सिवा में ही मूलयात्री था, इससे सभी मुझ को कप्तान और सदर कहने लगे। हम लोगों ने मेड्रिड में कई दिन ठहर कर शहर देखा। परन्तु ग्रीष्म बीतने ही पर था यह जान कर हम लोग झट पट वहाँ से रवाना हुए। अक्तूबर के मध्य ही में कहीं कहीं बहुँ पड़ने लगी है, यह चुन कर भय से प्राण सूखने लगे । फ्रांस .. की सीमा तक आते आते हम लोगों ने देखा कि यथार्थ ही पाला पड़ रहा है । मैं उत्कट गरमी के मुल्क में बहुत दिन तक रह चुका था इससे अब यह जाड़ा असह्य मालूम होने लगा। उंगलियाँ पाले से ठिठुर कर गलने लगीं। फ्राइडे ने बर्फ से ढका पहाड़ और ऐसा उत्कट जाड़ा जन्म भर में