पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२६०

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जीवनवृत्तान्त के प्रथम अध्याय का उपसंहार। २३७ भेड़िये उन्हें फाड़ फाड़ कर खा रहे हैं । एक मनुष्य को सिर से आधे धड़ तक खा चुके हैं ! उसके पास एक बन्दूक पड़ी है । कुछ देर पहले शायद इसी शख्स के बन्दूक चलाने की आवाज सुन पड़ी थी । यह देख कर भय से हम लोगों के प्राण सूख गये । क्या करना चाहिए, कुछ समझ में न आता था । किन्तु उन हिंस्त्रपशुओं ने हम लोगों के कर्तव्य को शीघ्र ही स्थिर कर दिया । उन्होंने शिकार के लोभ से हम लोगों के घेर लिया । उनकी संख्या तीन सौ से कम न होगी । हम लोगों के भाग्य से प्रवेश मार्ग के पास ही, जंगल के भीतर, एक पेड़ का तना कटा पड़ा था । मैं अपने छोटे से दल को शीघ्र ही उस विशाल पेड़ की आड़ में ले गया । हम लोगों ने घोड़े से उतर कर एक त्रिभुजाकार व्यूह की रचना की और उसके बीच में घोड़ों को कर लिया । भेड़िये गुर्रा गु कर हम लोगों की ओर दौड़े और जिस पेड़ की आड़ में हम लोग छिपे थे उस पर कूद कूद कर चढ़ने लगे । मैंने अपने साथियों से कह दिया की पूर्ववत् एक के बाद एक बन्दूछ छोड़ी जाय। पहली ही बेर हम लोगों ने बहुत भेड़िये मार डाले । किन्तु इतने पर भी वे हम लोगों पर आयकर भाव से आक्रमण कर रहे थे। सामने के कुण्ड ो जब तक हम मार भगाते थे तब तक पीछे वाला झुण्ड हम लोगों पर हमला करता था। इसलिए हम को आगेपीछे दोनों ओर लगातार बन्दूक कों की आवाज करनी पड़ी । चारपाँच बेर की आवाज में हम लोगों के हाथ से सत्रह अठारह भेड़िये मरे और इससे दुगुने घायल हुए तो भी वे ऐसे निर्धक थे कि पीछे न हटे । एक एक बार गोली खा कर क्षण भर खड़े रहते और फिर एकाएक आगे आते थे। तब मैंने अपने दूसरे नौकर से कहा‘तुम इस कटे हुए -