पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२६२

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जीवनवृत्तान्त के प्रथम अध्याय का उपसंहार। २३8 दूसरे दिन सबेरे हम लोगों के पथप्रदर्शाक को जख्मी हाथ के सूजने से ज्वर हो आया । वह वहाँ से आगे न जा सका । तब हम लोग एक नये पथप्रदर्शक को साथ ले ढलुज शहर के गये । मैंने अपने दोनों कान मल कर सौगन्द खाई कि फिर कभी इस रास्ते कहीं न जायेंगे। इस मार्ग की अपेक्षा जलथल में नाव डूब जाने से पानी में डूब जाना कहीं अच्छा है । लुलु से पैरिस, वहाँ से कैलेऔर कैले से १४ वीं जनवरी को हम लोग निर्विप्न डोवर प चे। मैंने अपनी पूर्व- परिचित कप्तान की विधवा स्त्री के पास अपनी सब धन सम्पत्ति रख दी । वह विश्वासपूर्वक मेरे साथ उतम व्यव- हर करने लगी। मैंने अपने मित्र वृद्ध कप्तान के ज़रिये ब्रेज़िल की ज़मीं दारी बेच कर ढाई लाख रुपये प्राप्त किये । इस प्रकार मेरे अतिविचित्र जटिल जीवननाट्य के प्रथम अंक का यवनिका पात हुआ । आरम्भ। में तो मैंने बहुत कष्ट उठाये, पर अन्त में मुझे बहुत ही सुख मिला।