पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२६५

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राबिन्सन क्रूसो ।

२२ राबिन्सन क्रसो । । हैं और उसी से भूतप्रेत देख पड़ते हैं, वे भूतों के साथ बातें करते हैं और उनकी बातें सुन सकते हैं। यथार्थ में भूत है कि नहींयह मैं नहीं जानता । अब तक तो मैंने कभी धूत नहीं देखा, किन्तु दिमाग गर्म होने से जो मन में भाँति भाँति की भ्रान्तियाँ उत्पन्न होती हैं इसका मुझे पूर्णपरिचय है । मस्तिष्क उत्तेजित होने से लोगों के मन में विचित्र भावनायें होने लगती हैं। कभी कभी मेरे मन में यह भावना होती थी कि मैं अपने द्वीप में गया हूं और अपने किले के भीतर बैठ कर स्पेनिय, प्राइडे के बाप तथा विद्रोही नाविकों के साथ बातें कर रहा हैं, उनका पारस्परिक विवाद मिटा कर कर्तव्य की मीमांसा कर रहा हूं और अपराधियों के दण्ड की व्यवस्था कर रहा हूं। इस तरह सेचतेविचारते कई साल गुज़र गये । मेरे पास आराम की सब सामग्री थी, फिर भी मुझे दिनरात छटपटी लगी रहती थी । न दिन को चैन मिलता था न रात को नींद आती थी । मैं हर घड़ी सेचसागर में डूबा रहता था । एक दिन मेरी स्त्री ने कहा, “आपके चित्त की अवस्था देख कर यही जान पड़ता है कि ईश्वर किसी महान उद्देश से आपको इस ओर खींच रहे हैं। इस समय में और बालबच्चे आपके बाधक हो रहे हैं । मैं आपको छोड़ कर अकेली न रह सकेंगी । मेरी मृत्यु होने ही से आप निर्बन्ध हो सकते हैं । अभो आप अपने को एक प्रकार से बद्ध समझे ।’ यह कहते कहते उस बेचारी की आंखों से आंसू टपक टपक कर गिरने लगे । इसके बाद फिर उसने कहा, इस बुढ़ापे में आपका देश देशान्तर का घूमना अच्छा नहीं। आपकी अब वह उम्र नहीं जो स्वतन्त्रता-पूर्वक देश-भ्रमण करेंयदि आपका जाना ज़रूर ही होगा तो मैं भी आपके साथ चलेंगी ।’ ली की