पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२७२

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दूसरी बार की विदेश यात्रा । २४६ मेरा नसीब जैसा ख़राब था वैसा कोई विशेष संकट इल दफ़ संघटित न हुआr । पर यह बात नहीं कि सद्टों ने मेरा पीछा क़तई छोड़ दिया । रवाना होने के साथ ही प्रतिकूल वायु बहना और पानी बरसना शुरू हुआ । मैंने समझा कि मुझको विपत्ति में डालने ही के लिए इस प्रकार प्रकृतिविपर्यय हो रहा है । प्रतिकूल वायु हम लोगों के जहाज़ को उत्तर ओर ठेल कर ले गया। हम लोग आयरलेन्ड के गालवे बन्दर में बाईस दिन तक टिके रहे । यहाँ खाद्य-सामग्री ब सस्ते दाम पर बिकती थी। हम लोगों ने साथ की रसद स्र्च न कर के खरीद कर खाया और कुछ जहाज़ में रख भी लिया। यहाँ मैंने बहुत से सूaर, गाय, और बछड़े मोल लिये । मैंने उन्हें अपने टापू में ले जाना चाहा था, पर बहाँ तक वे न पहुंच सके। हम लोग ५वीं फ़रवरी के अनुकूल वायु पा कर आयर लेन्ड से रवाना हुए । २४ वीं फ़रवरी को जहाज़ के मेट ने आ कर कहा-हमने तेrप लूटने की आवाज़ सुनी है और आग की झलक देखी है ।' हम लोग दौड़ कर डेक के ऊपर गये । कुछ देर तक तेश कुछ सुनाई न दिया पर कुछ ही देर के बाद आग की ज्वाला देखने में आई। कहीं दूर खूब ज़ोर की आग लगी है । उस महासमुद्र में पाँच सौ मील के भीतर कहीं स्थल का नामनिशान न था, इसलिए सोचा कि ज़रूर किसी जहाज़ में आग लगी है । इसके पहले जो तेप की आवाज़ सुनी गई थी वह इसी विपत्ति की सूचना थी । जब तेप की आवाज़ हुई थी तब वह जहाज़ हमारे जहाज़ से बहुत दूर न था। हम लोग उस प्रकाश की ओर जहाज़ को ले चले। जितना ही आगे जहाज़ जाने लगा उतना ही प्रकाश का आधिक्य दिखाई देने लगा । कुहरा फैला रहने के कारण हम