पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३०१

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२७ राबिन्सन क्रो । वस्तुओं के लेकर वे लोग बहुत उलझन में पड़े ।न उनसे जाते ही बनता था और न ठहरते ही। आखिर व लोग क्या करते। लाचार हो कर वहाँ से बिदा हुए और अपने रहने को जगह ढूंढने लगे। उन्होंने टापू के दूसरी ओर एक सुभीते की जगह टूढ़ ली । तीनों अंगरेज़ वहाँ घर बनाकर एक साथ रहने लगे। मारने लायक हथियार के सिवा उन लोगों के और किसी वस्तु की कमी न रही । इस प्रकार स्वतन्त्रता पूर्वक उन्होंने छः मास बिताये । जब उन लोगों की गृहस्थी का कारबार जम गया तब फर उनको शैतानी करने की सूझी । उन लोगों के जीवन निर्वाह का यह श्रमसाध्य ढंग अच्छा नहीं लगा। उन्होंने सोचा कि असभ्य देश में जाकर दो-चार असभ्यर्थी को पकड़ लावें और उनके नौकर का काम लें । इस विचार के चरितार्थ करने के लिए वे लोग व्यग्र हो उठे। एक दिन उन्होंने स्पेनिय की निर्दिष्ट सीमा के के पास आकर स्पेनियर्थी को एक बात सुनने के लिए पुकारा। स्पेनियर्ड जब सुनने गये तब उन्होंने अपना मतलब कह सुनाया और स्पेनियों से एक डोंगी तथा आत्मरक्षा के लिए एक बन्दूक उधार माँगी। स्पेनियर्ड तो चाहते ही थे कि किसी तरह इन दुष्टों की संगति से छुट्टी मिले-बरु भल वास नरक कर ताता, दुष्ट संग जनि देईि विधाता ।’ इसलिए अँगरेज़ के इस प्रस्ताव को उन लोगों ने सहर्ष माना। तथापि उन लोगों ने शिष्टता को जगह देकर अँगरेज़ों को बहुत तरह से समझाया कि तुम्हारा यह संकल्प बहुत ही ब्रिपदमूलक है । वे उस देश में जाकर या तो भूखों मरेंगे या वहाँ निवासी नरपिशाचों के मुंह के आहार होकर प्राण गवाँगे ।