पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३०३

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२० राबिन्सन क्रसे। उनसे कहा कि टाबू में कोई बड़ा आदमी आया है। सदर ने कहा-“असभ्य लोग आये होंगे ।' उसने कहा-‘नहीं नहीं, असभ्य नहीं हैं । पोशाक पहने हैं, कन्धे पर बन्दूक रक्खे हैं ।'सर ने कहा - तो फिर डरने की क्या बात है ? यदि वे लोग असभ्य नहीं हैं त वे हमारे मित्र ही होंगे क्योंकि किसी सभ्य जाति से हम लोगों का मर्केल के सिवा अमङ्गल होने की आशका नहीं है। इस तरह बातचीत हो ही रही थी कि इतने में उन तीन अँगरेज़ों ने किले के समीपवर्ती उपवन से निकल कर स्पेनियड को पुकारा । वे अपने परिचित अँगरेज़ों का कण्ठ- खर पहचान कर भेद समझ गये । परन्तु वे गरेज़ कहाँ से, और किस उद्देश्य से, लौट आये हैं इसका असली तव समझने की चिन्ता भी तो कुछ कम न थी । स्पेनियों ने उन्हें किले के भीतर बुला कर उनसे वृत्तान्त पूछा। अँगरेज़ों ने ये कहना प्रारम्भ किया- ‘हम लोग दो दिन में समुद्र के उस पार गयेकिन्तु वहाँ के निवासी हम लेागों के आगमन से डर कर तीर-धनुष सँभाल कर के हमारी अभ्यर्थना करने लगे । हम लोग सशस्त्र अभ्यर्थना को पसन्द न करके वहाँ उतरने का साहस न कर सके । छः सात घंटे किनारे किनारे नाव ले जाकर हम लोगों ने और भी कई टापू देखे । एक जगह हम लोग अपने भाग्य के भरोसे उतर पड़े। वहाँ के रहनेवाल ने हम लोगों को के भ्रातृ-भाव से ग्रहण किया और फलमूल तथा सूखी मछलियाँ खाने के लिए देकर आतिथ्यसत्कार किया । क्या स्त्री क्या पुरुष, सभी हम लोगों के अभावमोचन के लिए उत्साह-