पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३०४

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झूले के अनुपस्थितसमय का इतिहास । २८१ ' पूर्वक दूर दूर से अपने सिर पर आवश्यक वस्तुएं ढो ढो कर लाने लगे । हम लोग यहाँ चार दिन रहे और इशारे से उनसे आसपास के द्वीपनिवासियों के शीलस्वभाव का हाल पूछने लगे। असभ्यर्थी ने संकेत द्वारा कहा-‘सभी टापुओं के मनुष्य नरमांस खाते हैं, केवल हम लोग ऐसे हैं जो सब मनुष्यों का मांस नहीं खाते । किन्तु हम लोग भी युद्ध में गिरफ्तार हुए नरनारियेां को मार कर विजय के उपलक्ष में भोज ज़रूर करते हैं । अभी हाल ही में हम लोगों ने ऐसा ही नरमेध किया है । हम लोगों के महाराज ने दो सौ - दुश्मनों को बन्द कर रक्खा है। अभी वे खूब खिलापिला कर पुष्ट किये जा रहे हैं । इसके बाद एक दिन बहुत बड़ा भोज होगा ।' उन सब बन्दिय को देखने के लिए हम लोग अधिक उत्कण्ठित हुए । उन बन्दियों के देखने का बड़ा कुतूहल हुआ । किन्तु उन असयों ने इस कुतूहल को नरमांस-लोलुपता समझ कर इशारे से कहा इसके लिए इतनी आतुरता क्या ? कल तुम लोगों को भी कुछ मधु ष्य ला , उन्हें खा लेना ।’ दूसरे दिन सबेरे ग्यारह पुरुष और पाँच स्त्रियाँ लाकर हम लोगों को उपहार में दीं । मानो इन मनुष्य का मूल्य भड़बकर से अधिक नहीं है। हम लोग निर्दय आर घातक होने पर भी नरमांस खाने का नाम सुन कर सहम उठे। हम लोगों को उब काई छूने लगी और असभ्यों की इस राक्षसी प्रकृति पर हमें बड़ी घृणा हुई, किन्तु नरवलि का उपहार लौटाना असभ्यां के आतिथ्य का विषम अपमान है। इसलिए हम लोग बड़े संकट में पड़े। इतने लोगों को लेकर हम क्या करेंगे ? तथापि हमें यह उपहार स्वीकार करना ही पड़ा और उपहार के बदले हमने’ ।