पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३०६

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क्रूसो के अनुपस्थित-समय का इतिहास ।

क्र से के अनुपस्थितसमय का इतिहास । २८३ । घर जाकर देखा कि सभी के हाथ बँधे हैं । स्त्री-पुरुष दोनों बिलकुल न धड़ों हैं और सब एक ही साथ बैठे हैं। यह दृश्य स्पेनियर्थों की आखों म बेतर है बुरा मालूम हुआ । पुरुष अच्छे हट्टेकट्टे और बलिष्ठ थे। कद लम्बा सा, शरीर सुगठित, चेहरा देखने में बुरा न था । उन तीस से पैंतीस के भीतर थी । स्त्रियाँ भी बदसूरत न थीं । शरीर लावण्ययुक्त था । केवल रन साँवला था। यदि बदन का रंग गोरा होता तब से वे ख़ास लन्दन की सुन्दरियों में परिगणित होतीं और आदर पातीं। उन में दो त्रियाँ तीसचालीस वर्ष की थीं । दो त्रिों की उम्र चौबीस-पच्चीस वर्ष की थी । एक नवयौवना थी । उसकी उम्र सेलह सत्रह वर्ष से अधिक न थी। सब की अपेक्षा यही विशेष रूपवती थी। फ्राइडे के पिता ने दुभाषिया बन कर उन असभ्य के समझा दिया कि ‘तुम लेागों को प्राणों का भय न होगा । सभ्यजाति के लोग मनुष्य का मांस नहीं खाते ।' यह आश्वा सन-वाक्य सुन कर उन लोगों के हर्ष का बारापार न रहा । वे अपने हृदय का उलास इस प्रकार प्रकट करने लगेजिसका वन करना कठिन है। इसके बाद उन लोगों से यह बात पूछी गई कि तुम हमारे समाज की अधीनता स्वीकार कर काम करने को राज़ी हो या नहीं । यह प्रश्न सुनते ही वे लोग मारे खुशी के नाचने लगे। इसका आशय यही कि हम लोग हृदय से काम करना पसन्द करते हैं। किन्तु स्पेनियों के सर स्त्रियों के आने से डर गये। अँगरेज़ लोग ों ही आपस में लड़तेझगड़ते थे। अब इन स्त्रियों के कारणमालूम होता है भारी फ़साद उठ खड़ा होगा। " .