पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३१८

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द्वीप में श्रअसभ्य का उपद्रव । २४५ बन्दी-नृत्य भी आया जो स्पेनियों को खबर देने गया था, और वह कैदी भी आया है जिसे कुछ देर पहले हाथपैर बाँध कर पेड़ के नीचे डाल दिया था । स्पेनिय ने आते समय उसके हाथपैरों का बन्धन खोल कर उसे साथ ले लिया था । गुफाके भीतर आने के पर बन्दी को फिर बाँध कर दूसरे दो बन्दिों के साथ बैठा दिया। द्वीपवासियों को ये बन्दी भारस्वरूप जान पड़े। क्योंकि ये लोग अधीनता में नहीं रहना चाहते थे। उनको घर में खाली बिठा कर खिलाना भी कठिन है, और जो छोड़ दें तो वे देश जाकर अनर्थ खड़ा करेंगे । ऐसी हालत में उनके बध के सिवा और कोई उपाय नहीं । किन्तु सर उन लोगों को मारने की अनु- मति नहीं देते । उन्होंने हुक्म दिया कि ये बन्दी अभी मेरी बड़ी गुफा में रहें, दो स्पेनियर्ड उनके पहरे पर रहेंगे, और स्पेनियर्ड लोग उनके खानेपीने का प्रबन्ध करेंगे । स्पेनियड के आने से साहस पाकर अँगरेज़ उन असभ्याँ की खोज में बाहर निकले और बड़ी सावधानी से कुछ दूर आगे जाकर देखा कि सभी असभ्य जाने के लिए नाव पर सवार हो रहे हैं । उन लोगों के चलते समय बन्दूक की गोली से एक बार बिदाई का संभाषण न कर सकने के कारण वे उदास हुए । किन्तु उन को जाते देख कर प्रसन्न भी हुए। अँगरेज़ों का घरद्वार खेती बाड़ी सब नष्ट हो गई थी। इस कारण सभी ने मिलकर हाथोंहाथ थोड़े ही दिन में उनकी गृहस्थी का सब सामान ठीक कर दिया। यहाँ तक कि उन तीन दुशील अँगरेज़ों ने भी उनकी सहायता से मुंह न मोड़ा। असभ्य के चले जाने पर भारी तूफ़ान उठी। दो दिन के बाद दीपवासियों ने बड़ी खुशी के साथ देखा कि असभ्य