पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३३८

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


उपनिवेश में समाज और धर्मसंस्थापन । ३१५ ठीक नहीं । तुम अच्छे घराने के मालूम होते हे । तुम्हारा शील खभाव भी अच्छा है । देश में तुम्हारे खजनव भी हैं। ऐसी अवस्था में एक दासी के साथ ब्याह करना क्या तुम्हें अच्छा जान पड़ता है १ फिर बह दासी भी तो तुम्हारे य यपात्र नहीं है । एक । तो वह तुम्हारी टहलनी है, दूसरे तुमसे वह नौ दस वर्ष उम्र में बड़ी है । तुम अधिक से अधिक सत्रह-अठारह वर्ष के होगे और दासी की उम्र २६२७ साल से कम न होगी । मैं तुमको इस द्वीप से तुम्हारे देश पहुँचा हूँगा। तब तुम ज़रूर इस हठकारिता के लिए अनुतप्त होगे और तुम दोनों का जीवन शोचनीय हे उठेगा ।’ मैं असम ब्याह के अनेक दोषों के सम्बन्ध में एक लम्बी वक्तता देने चलता था, किन्तु उसने मुस- कुरा कर बड़ी नम्रता से मेरे व्याख्यान में बाधा डाल कर कहा—महाशयआपने मेरी बात समझी नहीं । मेरा वह मतलब नहीं जो मापने समझा है। मैं दासी के साथ ब्याह करना नहीं चाहता । आप लाये हुए मिस्त्री के साथ वह ब्याह करना चाहती है । यह सुन कर मैं प्रसन्न हुआ। वह दासी जैसी शान्त स्खभावा, शिष्ट और सुशीला थी वैसा ही उसने आपने लिए बर भी चुना था। मैंने उसी दिन उस दासी का ब्याह कर दिया । उन वधूवरों को मैंने यौतुक-वरूप कुछ जमीन दी और उस नवयुवक को भी थोड़ी सी जमीन दी। पीछे ये लोग आपस में जगह-ज़मीन के लिए लड़ाईझगड़ा न करें, इसलिए सबके रहनसहन, खेतखलिहान आदि के ग्य ज़मीन के चारों ओर की सीमा निधि कर के पट्टा लिख दिया और उन लोगों से 'कुबूलियत लिखा ली । पट्टे पर मैंने अपनी मुहर कर दी और कबूलियत पर उन लोगों का हस्ताक्षर करा कर गवाहों से भी