पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३४०

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में उपनिवेश में समाज और धर्मसंस्थापन । ३१७ कर दी। विल पटकिंस पुरुषों में धर्म का प्रचार करने लगा। अहा ! ईश्वर की बड़ी विचित्र महिमा है ! जो व्यक्ति दो दिन पहले उनका नाम न लेता था वही आज उनकी महिमा का सर्वश्रेष्ठ प्रचारक बन बैठा । मैंने इन लोगों को अपनी बाइ बिल दी। एटकिंस ने उस प्रन्थ को देख कर बड़े आग्रह से दोनों हाथो से उठा लिया और मारे खुशी के उसकी आंखों से आंसू बहने लगे । उसने अपनी स्त्री को पुकार कर कहा—देखोदेखोजिस ग्रन्थ के लिए मैं भगवान से प्रार्थना कर रहा था वह ग्रन्थ आज अनायास मुझे मिल गया । यह ग्रन्थ हम लोगों की आशता का निवारक, धर्मपथ का शिक्षक, विपद में सहायक और शोक के समय धैर्यदायक होगा। पटकिंस की स्त्री ने समझा कि स्वयं ईश्वर ने हम लोगों के उपकारार्थ यह ग्रन्थ भेज दिया है। मैंने उन लोगों को समझा दिया कि ईश्वर अप्रत्यक्ष-कारण होने पर भी वे मन- वाणी के अगोचर हैं । वे जो कुछ करते हैं आप्रकट रूप से ही करते हैं । उनका अलौकिक कार्य ही उनके कारण होने का पूरा प्रमाण है । धूर्त पुरोहितगण इसी विषय को लेकर अनेक सम्- दाय कल्पित करके उन्हें विविधभ्रान्तधारणाओं में उ लझा रखते हैं । किन्तु मेरी इच्छा थी कि मेरे टापू में बुद्धिविचार से ही धर्म की प्रतिष्ठा हो । मैं इन लोगों के लिए जलक्रीड़ा करने के उपयुक्त नाव और तोप लाया था । वे दोनों चीजें मैंने इन लोगों को न दीं। कारण यह कि ये लोग जो इतने दिनों से आपस में लड़ते झगड़ते आये हैं, तो कौन जाने मेरे पक्ष में ये लोग फिर वैसे . ही झगड़ने लग जाp तब तो सर्वनाश ही होगा।